Posts

Featured post

A Pandemic which changed us alot

Image
Cheers, to this pandemic We all are losing everything right now Chance to interact and socialize Chance to learn and grow  Everything is somewhere left behind Everyone is losing a part of their life Let's talk about the changes  I'm dealing with  I stopped talking to people  Now I'm afraid to face them I have developed anxiety And much more depressing habits I was never like this  I was an extrovert, talkative and happy I was full of confidence and enthusiasm No, I'm not that person anymore  Nor I'm happy with the person I'm now, I just want to laugh like before  Live carefreely like before I just want to be my before self again But now that seems impossible  This is me so sorry if I don't pick up ur calls  I don't feel like talking Sorry I don't call u I never stopped caring about anyone it's just that now a phone call feels so heavy Sorry  I don't know what happened to me but this is me  The new me the pandemic person ...

फोटो की महिमा

Image
'फ़ोटो नही लगाने से नेताजी हुए नाराज़ ' फ़ोटो कहने को तो यादो को सहेजने का साधन है ,लेकिन इसकी अहमयित आज भी उतनी ही बरकरार है जितनी पहले हुए करती थी ! बड़े खास होते है ये फ़ोटो शादी से लेकर किसी के गम तक मे  इनका बड़ा नाम ओर काम होता है , हम उस समय से काफी आगे निकल चुके है जब एक फोटोग्राफ खिंचवाने के लिए किसी व्यक्ति को घण्टो कैमरे के आगे एक ही मुद्रा में किसी मूर्ति की तरह रहना पड़ता था , समय के साथ तकनीक के बूते पर आज हम मोबाइल से ही एक क्लिक करके  फोटो या पिक ले सकते है ! आईडी कार्ड से लेकर पासपोर्ट तक , कागज़ के आवेदन से लेकर सोशल मीडिया के प्रोफाइल तक ये हमारी पहचान का एक खास ज़रिया बन गया है । किसी के लिए खुशी का मौका हो या दुख का  आज लोग ,लोग अपनी भावनाएं सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो के साथ साझा करते है, किसी चीज़ का प्रचार हो या प्रसार तब तो ये ओर महत्वपूर्ण हो जाता है ,  लोगो के बीच  फ़ोटो की अहमियत का अंदाज़ा आप इस बात से  भी लगा सकते है कि रोजाना पढ़े जाने वाले अखबार में अगर आपकी तस्वीर या फ़ोटो किसी अच्छी खबर के साथ छप जाये तो उसकी खुशी का ठिकाना...

अफसर बाबू

Image
नमस्कार, साहब आये तो अफ़सर बाबू दौड़ पड़े ! "अफसर" या ऑफिसर ,साहब, इन सभी शब्दो को सुन कर हमारे दिमाग में एक ऐसे व्यक्त्वि की छवि उभरती है ,जो अनुशासित शालीन हो ,रॉब तो ऐसा की कर्मचारी खौफ से काँपने लगे,तुरन्त फैसले करने वाला ,समय का पाबन्द ओर सबसे पहले एक 'जिम्मेदार इंसान ' ! आपने कभी न कभी किसी अफसर,अधिकारी को देखा तो होगा ओर उसके काम करने के तरीके से , व्यक्त्वि से आकर्षित होने से आप अछूते भी नही रहे होंगे , आजके मन मे भी किसी ऊँचे पद पर काम करने की इच्छा जागी होगी ! हमारे यहां ओर किसी सरकारी अफसर को किसी राजा से कम नही आँका जाता , लाखो युवा इन्हें अपना आदर्श मानते है , इनकी जीवनशैली को अपनाना चाहते है ,लेकिन एक अफसर का जितना बड़ा पद होता है उससे बड़ी होती है उस पद -ओहदे की गरिमा और जिम्मेदारी ओर उतना ही बड़ा उसे पाने का संघर्ष और परिश्रम, खेर ये तो बात हुई एक अफसर ,अधिकारी के प्रति हमारे विचारो की ,  लेकिन हाल के इस कोरोना महामारी के दौर में हमे इनका एक अलग चेहरा देखने को मिला है ,वह जो कहि -कहि पर सच भी है ! अभी कुछ समय पहले एक शादी रुकवाने गए किसी प्रशासनि...

संस्थान: शिक्षण या सौदा

Image
नमस्कार, आज हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे है ,ऐसे समय मे आपको हर चीज़ के लिए दौड़ना पड़ता है, प्रतियोगिता करनी पड़ती है ,जी हाँ प्रतियोगता या 'कॉम्पिटीशन'  ,पुराना समय तो ये रहा नही जहां आपने पढ़ाई पूरी की ओर आपकी नौकरी लग गयी वो भी "सरकारी नौकरी"   क्यो खो गए ना ! पुराने समय में ?  तो चलते है अपने समय में , आज हर माँ-बाप की यही इच्छा होती है की अपने बच्चे की नौकरी हो ओर अगर सरकारी हो तो सोने पर सुहागा, लाखों सपने होते है माता-पिता ओर बच्चो के ओर इन्हीं सपनो का बाजार सजता है बड़े-बड़े शहरों में कोचिंग सेंटरों के रूप में , जी आपने सही सुना , कोचिंग एक ऐसी जगह जहां प्रवेश ले लेने का मतलब सफलता मिल ही जाएगी ऐसा समझा जाता है या आपके दिमाग मे भर दिया जाता है !   कोचिंग का नाम सुनते ही हमारे दिमाग आती है बड़ी सी बिल्डिंग ,एक लंबा-चौड़ा क्लासरूम  ओर ढेरो छात्र ! जितने तरह की परीक्षाएं उतने तरह के कोचिंग सेंटर , पालको की नज़र में कोचिंग ऐसी जगह है जहां जाकर पढ़ने से उनके के बच्चो का पढाई में प्रदर्शन अच्छा होगा, किसी विषय मे वो कमज़ोर हो तो उसे उस विषय को अच्छे ...

स्टूडेंट

Image
 सुना है छाबड़ा जी के बेटे का सेलेक्शन हो गया है ? तुम कितने नम्बर् से रह गए? अरुण आई.टी.आई. करलेना, तुम्हारे लिए वही काफी होगा ! अच्छा कमा लोगे , बस तुम्हारी  अंजू ग्रेजुएट हो जाए  , लड़का देखने की जिम्मेदारी मुझ छाबड़ा पर छोड़ दो, लड़किया कितना पड़ लेती है ,ऐसे ही ना जाने कितने छाबड़ा अंकल आपके ओर मेरे घर आकर आपके लिए फिक्र करते है और अपने ख़यालो को आप पर लपेट कर  चल देते है! ऊपर लिखी कुछ बातों से लगा ना आपको भी जुड़ाव , ओर शायद एक अजीब से चिढ़ भी आई होगी और याद आये होंगे कुछ अंकल -आंटी ,ओर न जाने कितने दूर के या पास के रिश्तेदार जिन्हें अपने बच्चो की खबर तो खैर है नही !  बेचारे भोले माँ-बाप तो अपने बच्चो की चिंता में डूब जाते है की बच्चा क्या करेगा? ,कैसे पढ़ेगा? ओर उससे ज्यादा इस बात की चिंता की ये चार लोग क्या कहेंगे/सोचेंगे? अब ये चार लोग कोन है पता नही ? एक तरफ माँ-बाप की चिंता, आशाए ओर अपने बच्चो से प्यार और एक तरफ ये दुनिया और उसमें बसे  लोग ओर रिश्तेदार  , इन सब के बीच घिरा होता है या होती है एक 'स्टूडेंट' ,छात्र बोलो या बच्चा , उसके मन मे क...

कोरोना-आजकल

Image
कोरोना -आजकल ,2019 के अंत मे चीन से एक वायरस फैलना शुरू हुआ ,धीरे-धीरे ये वायरस एक देश से दूसरे देश मे फैलता गया , ओर शुरू हुआ मौत ,बेरोजगारी,ओर बेबसी का खेल ! न जाने कितने लोगों के सहारे छीन गए , कितने बच्चे ,कितने बुज़ुर्ग बेसहारा हो गए! वो साल जब ना हमारे  पास  वेक्सीन थी , ना  कोई सटीक दवा , था तो बस हमारे पास हमारी आस ओर विश्वास ,डरते -सिसकते, घुटते हुए हम लड़ ही तो रहे थे उस मंजर से ! हाइड्रोक्सीस्क्लोरोक्विन से लेकर रेमदेसीवीर बोलना सीखने तक के इस फासले ने बहुत कुछ सीखा दिया हमे परिस्थितियों ने ! कई जगह मदद के हाथ बढ़े , तो कहि बेबसी ने तोड़ कर रख दिया , सवा दो साल के सी कोरोनाकाल में हमने क्या कुछ नही देखा,  हज़ारो किलोमीटर सुखी रोटी को पानी से हलक से उतारती हुई गीली आँखों से लेकर मदद की गुहार लगाती बिलखती चीत्कारों तक , फिर भी जीने की आस ओर जिदंगी की एक एक सास के लिए लोग दांव लगाते रहे ! धीरे धीरे वेक्सीन कि खोज शुरू हुई , ओर पूरी भी हुई , लेकीन क्या सवा सो करोड़ की आबादी वाले देश को पूरी तरह टीकाकृत करना इतना आसान था , जो सरकार एक साल तक नींद में रही ...

Symptoms of Drug Addicts and how can you help them

Image
नमस्कार, हैश ,  हैशीश , चरस , भांग, गांजा,  नशीले पदार्थ,  ड्रग्स  ओर  भी बहुत से नाम आप  24/7   लगातार सुन रहे है ! क्योंकि यह सब हमारे चहेते 'सितारे' जो ले रहे है ,  क्या हुआ? अगर 'कमलेश' व्हाइटनर नशे के तोर पर इस्तेमाल करता है ,  इस बारे में कोई  चिंता नही करेगा क्योंकि वो टी.आर. पी.  देने वाला व्यक्ति नही है। लेकिन अब जब यह सब सुर्खियों में है तो आप सब ये जान ही गए  होंगे  क्यों  यह  तथाकथित "सेलेब्स" ,सितारे  क्यों लेते है ,  लेकीन चलिए आज हम बात करेंगे इससे जुड़े कुछ आकड़ो ओर तथ्यों पर - 01) करीब 344 तरह के ड्रग्स पर भारत के " स्वास्थ एवं परिवार कल्याण मंत्रालय" ने पाबन्दी लगा दी है चूंकि ये नुकसानदायक है ! 02) सजा -  व्यापार -बाजार की मात्रा से कम ड्रग्स पाए जाने पर 10 साल के कड़ी कैद या 01 लाख रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है  और  व्यापारिक - बाजार  में मिलने वाली मात्रा से ज्यादा मात्रा में ड्रग्स पाए जाने पर 10 से 20 साल की कड़ी कैद या 02 लाख तक का ...