फोटो की महिमा

'फ़ोटो नही लगाने से नेताजी हुए नाराज़ ' फ़ोटो कहने को तो यादो को सहेजने का साधन है ,लेकिन इसकी अहमयित आज भी उतनी ही बरकरार है जितनी पहले हुए करती थी ! बड़े खास होते है ये फ़ोटो शादी से लेकर किसी के गम तक मे  इनका बड़ा नाम ओर काम होता है , हम उस समय से काफी आगे निकल चुके है जब एक फोटोग्राफ खिंचवाने के लिए किसी व्यक्ति को घण्टो कैमरे के आगे एक ही मुद्रा में किसी मूर्ति की तरह रहना पड़ता था , समय के साथ तकनीक के बूते पर आज हम मोबाइल से ही एक क्लिक करके  फोटो या पिक ले सकते है ! आईडी कार्ड से लेकर पासपोर्ट तक , कागज़ के आवेदन से लेकर सोशल मीडिया के प्रोफाइल तक ये हमारी पहचान का एक खास ज़रिया बन गया है ।

किसी के लिए खुशी का मौका हो या दुख का  आज लोग ,लोग अपनी भावनाएं सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो के साथ साझा करते है, किसी चीज़ का प्रचार हो या प्रसार तब तो ये ओर महत्वपूर्ण हो जाता है ,  लोगो के बीच  फ़ोटो की अहमियत का अंदाज़ा आप इस बात से  भी लगा सकते है कि रोजाना पढ़े जाने वाले अखबार में अगर आपकी तस्वीर या फ़ोटो किसी अच्छी खबर के साथ छप जाये तो उसकी खुशी का ठिकाना नही रहता और अगर किसी गलत खबर के साथ छप जाए तो  सबसे ज्यादा डर और बदनामी का दुख भी उसे ही होता है !
एक तरह से फ़ोटो -तस्वीर पत्रकारों, समाचार पत्रों , सोशल एवम अन्य मीडिया के लिए माध्यम भी बने है लोगो तक खबर पहुँचाने का , ठीक इसी तरह यदि किसी को अपना प्रचार -प्रसार करना है तो उसके लिए तो ये किसी वरदान से कम नही है जैसा की राजनीतिक चेहरों के कामो ओर  योजनाओ के रूप में भुनाया जाता है , आजकल सरकार ओर विपक्ष के बीच में इसी फ़ोटो के लिए खींचतान हो रही है , वो इसलिए कि कोरोना महामारी के दौर में चल रहै टीकाकरण कार्यक्रम 'वैक्सीनेशन प्रोग्राम' के तहत वैक्सीन  लगवाने के बाद मिलने वाले प्रमाण पत्र 'वैक्सीनेशन सर्टिफ़िकेट' पर माननीय प्रधान मंत्री 'नरेंद्र मोदी' का फ़ोटो क्यों लगा है ? इस बात पर विपक्षी राज्य सरकारों का तर्क है कि जब खर्चा राज्य की सरकारे कर रही है तो प्रधानमंत्री का फोटो क्यों लगाया जा रहा है उनके किसी नेता का फोटो लगाया जाना चाहिए , ऐसे में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री श्री जीतन राम मांझी का कहना है कि" जब लोगो के  वैक्सीनेशन सर्टिफ़िकेट पर प्रधानमंत्री का फ़ोटो लगाया जा रहा है तो कोरोना से मरने वाले लोगो के मृत्यु प्रमाण पत्र पर भी उनका फ़ोटो लगाई जाना चाहिये" ,  सुनने में ये बयान थोड़ा हास्यास्पद लगता है लेकिन ये सोचने पर मजबूर ज़रूर करता है कि क्या 'नेताओ' के फ़ोटो सिर्फ अच्छे कामो मे क्यो दिखाए जाते है? ,उन कामो में नही जिसमे कुछ गलती हुई है ? क्या केवल योजनाओं  के नाम पर उनका प्रचार करने के लिए , अगर कुछ गलत होता है तो वो इसकी जिम्मेदार क्यों नही लेते है? पक्ष हो या विपक्ष ,फ़ोटो को लेकर इनकी इस खींचतान में आम -नागरिक ही आइस रहा है , ऐसे में आवश्यक है कि जन प्रतिनिधि जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाए , कहि  उनसे जनता ये सवाल ना पूछने लगे जाए कि आप तब कहाँ थे ? जब हम मुसीबत में थे , क्या उस समय भी  आप गली या नगर के किसी काल्पनिक युवा ह्रदय सम्राट छुटभैय्ये नेता के साथ फ़ोटो खिंचवा रहे थे?

एक बात और कि जहां कुछ देर पहले तक जिन माननीयो द्वारा सामाजिक दूरी 'सोशल डिस्टेनसिंग' का ज्ञान जनता को दिया जाता है बाद में वही माननीय खुद सामाजिक दूरी के नियमो की धज्जियां उड़ाते नज़र आते है केवल एक फ़ोटो के लिए  जिससे उनकी झाँकी दिखे जनता को , अब ऐसे में जनता को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि केवल फ़ोटो देखकर किसी चीज़ पर फैसला न ले या अपनी राय बनाये  , बल्कि पूरी जानकारी मिलने के बाद , वास्तविक स्थिति जानने के बाद  किसी बात पर अपनी प्रतिक्रिया दे , साथ ही युवाओ से आग्रह है कि चलन या ट्रेंड के नाम पर बात पर फ़ोटो लेने के आदि न बने ओर सोशल मीडिया पर फैलने वाले भ्रामक फ़ोटो ओर पोस्ट आदी से थोड़ा सावधान रहें ।
                                       जय हिंद ,जय भारत
                                    

Comments

Popular posts from this blog

जानिये विदेशी एप्प्स की छुपी सच्चाई ओर कीजिये टिक-टॉक की मुँह दिखाई!!

poem on manisha valmiki rape case