संस्थान: शिक्षण या सौदा

नमस्कार, आज हम इक्कीसवीं सदी में जी रहे है ,ऐसे समय मे आपको हर चीज़ के लिए दौड़ना पड़ता है, प्रतियोगिता करनी पड़ती है ,जी हाँ प्रतियोगता या 'कॉम्पिटीशन'  ,पुराना समय तो ये रहा नही जहां आपने पढ़ाई पूरी की ओर आपकी नौकरी लग गयी वो भी "सरकारी नौकरी" 
 क्यो खो गए ना ! पुराने समय में ?

 तो चलते है अपने समय में , आज हर माँ-बाप की यही इच्छा होती है की अपने बच्चे की नौकरी हो ओर अगर सरकारी हो तो सोने पर सुहागा, लाखों सपने होते है माता-पिता ओर बच्चो के ओर इन्हीं सपनो का बाजार सजता है बड़े-बड़े शहरों में कोचिंग सेंटरों के रूप में , जी आपने सही सुना , कोचिंग एक ऐसी जगह जहां प्रवेश ले लेने का मतलब सफलता मिल ही जाएगी ऐसा समझा जाता है या आपके दिमाग मे भर दिया जाता है ! 
 कोचिंग का नाम सुनते ही हमारे दिमाग आती है बड़ी सी बिल्डिंग ,एक लंबा-चौड़ा क्लासरूम  ओर ढेरो छात्र ! जितने तरह की परीक्षाएं उतने तरह के कोचिंग सेंटर , पालको की नज़र में कोचिंग ऐसी जगह है जहां जाकर पढ़ने से उनके के बच्चो का पढाई में प्रदर्शन अच्छा होगा, किसी विषय मे वो कमज़ोर हो तो उसे उस विषय को अच्छे से पढ़ाया जाएगा,  हाँ ये सही भी है लेकिन जब इन्ही बातो कर न के नाम पर उनसे ज़रूरत से ज्यादा मोटी फ़ीस वसूली जाती है तब ये कहा तक सही है?

स्कूल की पढ़ाई से लेकर आई.आई.टी, आई.आई.एम तक, मेडिकल  से लेकर इंजीनियरिंग  तक के क्षेत्र में जाने के लिए आज कोचिंग को सफलता की सीढ़ी माना जाता है , ओर इनसे एक कदम आगे निकले हुए होते यू.पी.एस.सी, पी.सी.एस ,ओर अन्य प्रशासनिक ओर सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले संस्थान , इन सभी मे एक बात सब से आम है वो है इनकी ' मार्केटिंग'  ओर मार्केटिंग का स्तर भी ऐसा की ये गंजे को भी कंघा बेच डाले !

अब आप सोचेंगे  कोचिंग संस्थान तो अच्छा काम कर रहे है तो ये  मार्केटिंग की बात क्यों, लेकिन सच्चाई आज भी आप से दूर है , यह वह छात्र बड़े अच्छे से जानते होंगे जो इसका अनुभव कर चुके है या ठगे गए  है , बड़े संस्थान , बड़े नाम के बूते पर छात्रों को रिझाना ओर अपने यहां भर्ती करना तो प्रायः इनकी प्रव्रत्ति बन गयी है , शिक्षा को व्यापार बनाने में इनका महत्वपूर्ण  योगदान है !

सोचिए एक परीक्षा के कोर्स की फीस एक लाख से लेकर तीन लाख तक होती है केवल एक छात्र के लिए , तो कितने छात्रों से ये फीस वसूली जाती होगी और कितना आय इनकी साल भर की होती होगी , एक कोर्स की कम से कम 10-20 हज़ार से लेकर लाखो रुपए में फ़ीस होती है , साथ ही छात्र के दूसरे शहर में रहने-खाने का खर्च अलग , वाकई में ,आय का काफी अच्छा माध्यम बन चुके है ये संस्थान ,जहाँ पहले एक संस्थान था वहाँ आज हज़ारो की संख्या में संस्थान है और लाखों की संख्या में उन संस्थानों पे वाले भरोसा करने वाले छात्र ।

कोचिंग संस्थान जहां आपको ये विश्वास दिलाया जाता है कि यहां एडमिशन लेने से आपकी सफलता पक्की है ,बड़ी मेहनत से माता-पिता अपने बच्चो की साल भर की फीस जुटा पाते है या कुछ मेहनती बच्चे कुछ बनने की चाह में खुद के दम पर मेहनत से फीस भरते है जिसे वसूल कर ये संस्थान डकार तक नही लेते है , कोचिंग संस्थानों में कदम रखते ही आपको किसी भी तरह लुभा कर ,आकर्षित करके आपको अपनी सीट बेचना इनका पहला लक्ष्य होता है ओर इनका  टारगेट होते है आप,  ब्रोशर से लेकर प्रमोशनल वीडियो में जो दिखाया जाता है , सुंदर से सुंदर कॉउंसल्लर को बैठिया जाता है ,अपनी संस्थान को सफलता की बड़ी बड़ी ढींगे हाकी जाती है, सच्चाई उससे काफी अलग होती है , ओर छात्र ये मान बैठता है कि यहाँ एडमिशन नही लिया तो मेरी नौकरी नही लगेगी , में अफसर नही बन पाउँगा कई बार तीन दिन की  डेमो क्लास में जाने के बाद छात्रों पर तरह तरह से ऐडमिशन ओर फीस के लिए दबाव बनाया जाता है , 
 
इन्ही तरह की बातों का सच पता लगाने के लिए हमारी सह -लेखिका ने एक कोचिंग संस्थान में काम करने का निर्णय लिया, वहां काम करने उन्होंने पाया कि जो हमने सुना या अब तक देखा है सच्चाई उससे कई गुना आगे है , वहां यदि आप कंसल्टेंट या काउंसलर का काम कर रहे है तो आपका पहला लक्ष्य यही होना चाहिए कि आने वाले छात्र को अपने यहां एडमिशन लेने के लिए राज़ी करना भले ही संस्थान में लाखो कमिया हो, कॉउंसल्लर को यह कार्य दिया जाता है कि बच्चा किसी भी तरह बस हमारे यहाँ एडमिशन ले ले  फ्री डेमो क्लासेस , फ्री नोट्स ,पढ़ाई से परे बहुत से कार्यक्रम और सुविधाओं का लालच देना इनका पहला काम है , तीन दिन के डेमो में जिन शिक्षको द्वारा पढ़ाया जाता है उनकी जगह नियमित क्लासेस में  शिक्षको का बदल जाना  एक आम बात है, कई छात्रों ने अपने अनुभवों में बताया कि डेमो क्लास के बाद ही उन ओर फीस भरने ओर एडमिशन लेने का दबाव बनाया जाने लगा , अनुभवी शिक्षको के नाम उन लोगो के द्वारा उन्हें पढ़ाया जा रहा था जिन्होंने स्वयं कोई परीक्षा ना निकाली हो या बस किसी परीक्षा का  प्रारंभिक दौर ही पास कर पाए हो, हाँ, सीखने के लिए ये देखना जरूरी नही होता कि सिखाने वाला आपसे छोटा है या बड़ा लेकिन यहां बात छात्रों के भविष्य की है जो कि किसी अनुभवी की हाथो में हो तो ही सही है ना कि इन ठगों के ,
 
आज किसी स्टूडेंट हब शहर में दिन-ब-दिन नये नये संस्थान खुल रहे है जो आपकी सफलता की जिम्मेदारी लेते है ,क्या भरोसा है कि आप उनके यहाँ एडमिशन ले तो सफल हो ही जाएंगे , अगर वो इतने ही आत्मविश्वास में है तो परीक्षा न निकलने पर छात्र की फीस वापस करदे , यहाँ तो फिर वो यही जुमला फेकेंगे की एक बार भरी हुई फीस वापस नही होगी, या हमने तोह पढ़ाया था अपने ही कुछ गलती की होगी एक साल और दे इस प्रकार के जुमलो के अलावा आप पुराने छात्र है आपको फीस में छूट भी मिलेगा बोल के बहकना जैसे इन संस्थानों के लिए आम बात है तो किस आधार पर इतने आत्मविश्वास के साथ आपकी सफलता की ग्यारंटी देते है? 
 
 प्रतियोगिता के इस दौर में तैयारी करना ज़रूरी है , लेकिन क्या तैयारी करने के लिए इन पर निर्भर होना ज़रूरी है या बना दिया गया है? इन संस्थानो के कोर्स भी बहुत तरह के है जैसे ग्रेजुएशन के साथ-साथ हमारे यहां एडमिशन लेकर तैयारी करे ,तीन साल के कोर्स से लेकर 05 साल तक के कोर्स , ओर अगर आपको ये कम लग रहा तो  09-10-12वी कक्षा से तैयारी शुरू , कितनी प्रतियोगिता है वो भी उस दौर में जब उन्हें किसी पद का मतलब ही न पता हो? तरह तरह के लुभा कर आपकी जेब ढीली करने के अंदाज़ , किन माता-पिता को अपने बच्चे के भविष्य पर खर्च करने पर आपत्ति होगी लेकिन अपने बच्चे का भविष्य किसी गलत  व्यक्ति के हाथो में जाने से तो होगी ही, हर कोई कहता ग्रेजुएशन काफी महत्वपूर्ण पड़ाव होता है शिक्षा का तो इसे हल्के में लेना कितना सही है ? हर कॉलेज कहता कि छात्र का कक्षा में नियमित होना अनिवार्य है तो जब छात्र अपनी कक्षा छोड़ कर कोचिंग में समय बिताए तो कॉलेज की शिक्षा का क्या महत्व , महज़ एक डिग्री ? ओर इससे तो यही लगता है कि वह दिन दूर नही जब ये संस्थान खुद कॉलेज और यूनिवर्सिटी बन बैठेंगे!

ओर अपनी उपलब्धियां गिनाने में उन  कोचिंग संस्थानों का कहना ही क्या , जो एक ही छात्र का फोटो हर साल बदल बदल चयनीत छात्र के रूप में लगा कर अपना प्रचार कर रहे है , अब एक ही छात्र एक समय मे आठ-आठ संस्थानों में तो नही पढ़ सकता न ? नये छात्रों के बेच के साथ  पुराने बेच को पढ़ाना ,  अपनी सुविधा अनुसार छात्र से उसका कोर्स बदलवा लेना (उदाहरण के तौर पर ssc के छात्र को व्यापमं या UPSC के छात्र में देखने जायँगे तोह ऐसे अनेको उदहारण आपको मिलेंगे)  , हिंदी ओर इंग्लिश माध्यम के छात्रों को एक -साथ पढ़ाना आदि ! 
अब ये तो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र के ऊपर निर्भर करता है कि वो किस का चूनाव करता है , स्वयं की मेहनत या संस्थानों का खोखलापन ।
 सफल और अनुभवी छात्र , अफसरो का यही मानना है कि एक अच्छी कोचिंग आपको सही दिशा -और मार्गदर्शन दे सकती है , तैयारी करना , उसकी रणनीति , योजना बनाना ओर आपका सफल होना आप पर निर्भर करता है ।
 
साथ ही स्टूडेंट्स के पालको को हम ये संदेश देना चाहते है कि आप आपके बच्चे के भाविष्य के लिए उसका आज खराब ना करे, प्रतिस्पर्धा की भावना अच्छी है पर जब बच्चा ऐसी किसी कंपीटिटिव परीक्षा की तैयारी कर तोह उसका साथ दे जरूरी नही आपके बच्चे का चयन ही हो उसकी हार -जीत में उसका साथ दे याद रखें सीट चंद है और परीक्षार्थियों लाखो और इतनी मेहनत के बाद अगर बच्चे को परीक्षा में अगर सफलता मिलती है  तोह जीवन तोह सफल हो जाता है  पर एक असफलता ज़िन्दगी भर का आत्मविश्वास तोड़ देती है। 

जय हिंद
जय भारत।🙏

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