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Showing posts from September, 2020

ना कोई जुर्म था उसका ना कोई गुनाह,"लड़की "थी ना !जनाब बस इतना सा पाप उससे हुआ,

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जान उसकी ले ली उन जालिमो ने,, उसकी आबरु लूट के, इंसानियत भी रो पड़ी इंसानो की दरिंदगी देख के, ना कोई जुर्म था उसका ना कोई गुनाह, "लड़की "थी ना !जनाब बस इतना सा पाप उससे हुआ, क्या हुआ अब मोमबत्तीया नही जलाओगे ? निर्भया की तरह इसको इंसाफ नही दिलाओगे? 7 साल लगे थे निर्भया के  दोषियों को सज़ा होने में, अब बदलाव कहा से लाओगे ? उस लड़की उस मासूम की इज़्ज़त नही लूटी है, केवल तुम सब का मान चला गया, बदलाव की पीपुड़ी वाला  अभिमान चला गया ! राम मंदिर जिस राज्य में उस राज्य में तुम सीता जैसी बेटी को  ना बचा सके, रावण के राज तक में जो सुरक्षित थी तुम उस  धरोहर को भी गवाँ चुके, और हाँ, अगर इस बलात्कार  के खिलाफ आवाज़ नही उठाते हो तुम ! तो मनुष्य के दोगले चरित्र की पहचान हो तुम ! अगर बलात्कार में भी जात -पात ढूंढते हो ,तो हैवान हो तुम ! कंगना के घर टूटने पे शौक मनाने वालो  आज किसी के घर की लक्ष्मी  नहीं रही, सितारों की मौत पे दुख जताने वालो आज एक बेटी फिर चली गई! और हर उस बेटी बहन को संदेश है  मेरा, हर हाथ जो तुम पर उठे उसे काट देना जान ले लेना कोई बुरी नज़र ...

poem on manisha valmiki rape case

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टूट गई वो  दरिंदो के कहर से | कैसे निकल पाती वो  भेड़ियों के भंवर से |  इंसानियत कांप उठी  लेकिन इन दरिंदो के हाथ ना कापें डर से | मोमबत्तियां जला ली  सड़कों पर बैठ लिए  पर आज भी कोई लड़की अकेली निकल नहीं पाती इन दरिंदो के डर से | ना हो मुकदमे की ज़रूरत अब, और ना तारीखों की सुबहें ... ऐसी सजाएं दो इन नरभक्षियो को की इनकी लाशे भी चीखती रहे  इनकी कबर से  || #justice for Manisha Valmiki  #justice for humanity 🙏 Writer :- Ashish Sharma Instagram handle :- ashish_0318_

माँ-बाप की आस बेटा हु मैं

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बचपन मे मैंने किताबें फाड़ी, तो पिता ने मुझे पेड़ पर लटकाया। मेरे चरित्र निर्माण के लिये, माँ ने अपना फर्ज बखूबी निभाया। इनके कारण ही तो अस्तित्व में हु मैं, माँ-बाप की आस,बेटा हु मैं। बच्चे पढ़ लिख के साहब बने, इन्होंने अपना गांव ,घर- आंगन छोड़ा। दिन और रात की मेहनत एक करके,  बच्चों के सपनों को स्कूल से जोड़ा। इनके लिये ही तो सबसे मजबूत हूं मैं, माँ-बाप की आस,बेटा हु मैं। खुद से पहले हमारे बारे में सोचा है, हर चीज़ के लिये पहले हमें ही दिया मौका है। कपड़ों की बाजार हो या मिठाई की दुकान, इनकी पहली प्राथमिकता तो है हमारी मुस्कान, इनके त्याग को देखकर हैरान हूं मैं, माँ-बाप की आस बेटा हु मैं। घर पर कितनी भी मुसीबत भले हो, अपने सामने हमेशा इनको पाया है। पिता ने मेरी काबिलियत को निखारा, तो माँ ने भी कलाकारी को सराहा है। इनका तो सबसे बडा कलाकार हु मैं, माँ-बाप की आस,बेटा हु मैं। बहुत किया इन्होंने अब बारी मेरी है, इनके स्वाभिमान की अब जिम्मेदारी मेरी है, मैं न तो कभी थकूंगा न तो कभी रुकूँगा, हमेशा अपने कर्तव्य पथ पर डटा रहूंगा । इनके लिये कुछ भी करने को तैयार हूं मैं, माँ-बाप की आस,...

तुझको ना पढ़ पाया, तुझको ना समझ पाया।

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  पढ़ ली किताबें बहुत पर तुझकों न पढ़ पाया, जब भी कोशिश की तो मैंने कुछ नया ही पाया पढ़ने को तुझे ये नेत्र मेरे ठहरें है पर पता चला कि राज तेरे समंदर से गहरे है गर राज तेरे समंदर तो में गोताखोर बन जाऊं ऒर बिन लगायें पता में वापस कभी न आऊं डूबकर समंदर में मैने गहराई को भी नापा है देखकर चेहरा तेरा,मैने प्यार को भी भापा है यह प्रेम लाख छुपायें मगर छुपता नहीं पा लेता वक़्त पर तुझें तो किसी और को ढूंढता नहीं न जाने क्या कहेंगी दुनियाँ मेरे प्यार को फ़र्क नहीं पड़ता गर अपना लेती ख़ुशी से तू मुझें तो दिल में जर्क नहीं पड़ता मिल कर तुझसे ये दिल शायराना हो गया खो न दु तुझें इस डर से कायराना हो गया पर तुझें में भूल जाऊं ये भी मुमक़िन नहीं प्यार मेरा निःस्वाद रहा, कभी नमकीन नहीं जानता हूं में कि तू नहीं कभी मानेंगी लेकिन यह ज़िद हे मेरी ये तो मौत से भी ठानेगी गर मना भी लिया मैंने इसे तो ये शर्त पर टिक जाएगी बसा न पाए दूजा दिल में रीत यही चलायेगी। - अतुल सोनी

Poem on TEACHER'S Day

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A teacher teaches us the way of life and in life how to survive,  they make us learn and in future how to earn, A teacher teaches us about success and failure,  they help us in every way, Most importantly they teach us how to be a good citizen and a good person, f orever their teachings surive in mind, making us strong and wise,  They enlighten our path like a lamp in dark, t hey make us reach heights while staying their like teachers for our alike,  Their selfless deeds and the purity in their mind, Make them a saint in disguise. This teachersday  and everyday of our lie we want to thank each an every teacher of our  life, Who guided us towards light.

एक खास अहसास....दोस्ती

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दोस्ती.......  नमस्कार, हम  भारतीय  लोगो के लिए हर चीज़ के अलग ओर खास माईने होते है , ऐसी ही खास चीज़ो में शामिल है, हमारा परिवार और  उससे जुड़े रिश्ते ,  आमतौर पर भारतीय संस्कृति में ही परिवार और उससे जुड़े रिश्ते सबसे ज्यादा होते है और उनसे ज्यादा उनकी अहमियत , जो की एक इंसान को दूसरे से जोड़े रखती है, फिर चाहे वो दुनिया के किसी भी हिस्से में हो!  इन्ही खास रिश्तो से परे एक बेहद खास रिश्ता होता है  "दोस्ती" का, वह रिश्ता जिसमे हम शायद एक दूसरे से बिल्कुल परे होने पर भी एक दूसरे से जुड़ जाते है !  दोस्ती एक ऐसा भाव है जो की लोगो को आपस मे जोड़ता है , यह एक अनजान से दूसरे अनजान , या अपने किसी परिवार के व्यक्ति से हो सकती है ,  हम उम्र  नोजवानो , बच्चो , ओर बड़े लोगो के लिए दोस्ती के अपने मतलब है , कई बार तो हमारे दोस्त भी हमारे परिवार का हिस्सा हो जाते है , दोस्त एक ऐसा नायाब  एहसास है  जिसके अंदर रहते हुए हम लोगो को जानने , समझने लगते है , बिना किसी शर्त के उन्हें चाहने लगते है, पसन्द करते है, उनका भला चाहते हों और उनकी फि...