ना कोई जुर्म था उसका ना कोई गुनाह,"लड़की "थी ना !जनाब बस इतना सा पाप उससे हुआ,
जान उसकी ले ली उन जालिमो ने,, उसकी आबरु लूट के, इंसानियत भी रो पड़ी इंसानो की दरिंदगी देख के, ना कोई जुर्म था उसका ना कोई गुनाह, "लड़की "थी ना !जनाब बस इतना सा पाप उससे हुआ, क्या हुआ अब मोमबत्तीया नही जलाओगे ? निर्भया की तरह इसको इंसाफ नही दिलाओगे? 7 साल लगे थे निर्भया के दोषियों को सज़ा होने में, अब बदलाव कहा से लाओगे ? उस लड़की उस मासूम की इज़्ज़त नही लूटी है, केवल तुम सब का मान चला गया, बदलाव की पीपुड़ी वाला अभिमान चला गया ! राम मंदिर जिस राज्य में उस राज्य में तुम सीता जैसी बेटी को ना बचा सके, रावण के राज तक में जो सुरक्षित थी तुम उस धरोहर को भी गवाँ चुके, और हाँ, अगर इस बलात्कार के खिलाफ आवाज़ नही उठाते हो तुम ! तो मनुष्य के दोगले चरित्र की पहचान हो तुम ! अगर बलात्कार में भी जात -पात ढूंढते हो ,तो हैवान हो तुम ! कंगना के घर टूटने पे शौक मनाने वालो आज किसी के घर की लक्ष्मी नहीं रही, सितारों की मौत पे दुख जताने वालो आज एक बेटी फिर चली गई! और हर उस बेटी बहन को संदेश है मेरा, हर हाथ जो तुम पर उठे उसे काट देना जान ले लेना कोई बुरी नज़र ...