तुझको ना पढ़ पाया, तुझको ना समझ पाया।
पढ़ ली किताबें बहुत पर तुझकों न पढ़ पाया,
जब भी कोशिश की तो मैंने कुछ नया ही पाया
पढ़ने को तुझे ये नेत्र मेरे ठहरें है
पर पता चला कि राज तेरे समंदर से गहरे है
गर राज तेरे समंदर तो में गोताखोर बन जाऊं
ऒर बिन लगायें पता में वापस कभी न आऊं
डूबकर समंदर में मैने गहराई को भी नापा है
देखकर चेहरा तेरा,मैने प्यार को भी भापा है
यह प्रेम लाख छुपायें मगर छुपता नहीं
पा लेता वक़्त पर तुझें तो किसी और को ढूंढता नहीं
न जाने क्या कहेंगी दुनियाँ मेरे प्यार को फ़र्क नहीं पड़ता
गर अपना लेती ख़ुशी से तू मुझें तो दिल में जर्क नहीं पड़ता
मिल कर तुझसे ये दिल शायराना हो गया
खो न दु तुझें इस डर से कायराना हो गया
पर तुझें में भूल जाऊं ये भी मुमक़िन नहीं
प्यार मेरा निःस्वाद रहा, कभी नमकीन नहीं
जानता हूं में कि तू नहीं कभी मानेंगी
लेकिन यह ज़िद हे मेरी ये तो मौत से भी ठानेगी
गर मना भी लिया मैंने इसे तो ये शर्त पर टिक जाएगी
बसा न पाए दूजा दिल में रीत यही चलायेगी।
- अतुल सोनी
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