माँ

यह कविता हर उस भावना को  व्यक्त करती है जो मैं या हर बेटी अपनी मां के लिए महसूस करती है मां जब हमारे साथ रहती है तब तो हम उनकी कदर नहीं कर पाते पर जब वह हमसे दूर हो जाती हैं तो उनके बिना रह भी नहीं पाते।


मेरी मां के लिए मेरा प्यार मैं शब्दों में तो नहीं सहेज सकती पर कुछ शब्दों के माध्यम से व्यक्त जरूर करना चाहती हूं ...यह उन दिनों की बात है जब मैं अपनी मां से दूर थी  :-


मां घर याद आता है मुझे ,सब याद आता है मुझे,

वह तेरा मुझे हर बात पर समझाना ,हर गलती पर डांट लगाना,

मेरे लिए हर किसी से लड़ जाना,मुझे हमेशा सही गलत का भेद बताना,

मां घर याद आता है मुझे, सब याद आता है मुझे,

वह मेरा बिलक बिलक कर रोना ,वह तेरा मुझे दुलार करना

वह मेरी हर बात पर जिद,और तेरा हर जिद को पूरा करने की कोशिश करना,

वो तेरा एक एक पाई बचा कर ,मेरी हर ख्वाहिश को पूरा करना,

खुद की जरूरतों को ताक में रख ,मेरे लिए जी तोड़ मेहनत करना

मां सब याद आता है मुझे,घर याद आता है मुझे,

वह तेरा मेरी खुशी के लिए जीना मेरे लिए संघर्ष करना,

वो तेरा मुझसे अपने सपनों को साकार करने की उम्मीद रखना,

वो तेरा मेरे भविष्य की मुझसे ज्यादा फिक्र करना

माँ सब याद आता है मुझे,घर याद आता है ,

मुझे पर सोचा ना था तुझसे दूर होकर में  टूट जाऊंगी

तू हाथ छोड़ेगी वैसे ही बिखर जाऊंगी,

अब ना कोई आता है समझाने ,ना कोई सही राह दिखलाता है ,

मां तेरे बिना यह अकेलापन बहुत खाता है ,

ना जाने क्यों तेरी यादें मुझे बहुत सताती हैं 

रातों को अब तेरे बिना  नींद भी कहां आती है,

माँ तुझसे ही सब सीखा है ,मैंने तुझसे ही सब जाना, 

तेरे सिवा हर रिश्ते ने बस मतलब के पुकारा ,

एक तू ही सच्ची थी जिसने बस बिना मतलब के मुझे सावारा

माँ तेरे साथ गुजरा हर लम्हा मुझे तेरी अहमियत का एहसास दिलाता है ,

मां सब याद आता है मुझे,घर याद आता है मुझे

तेरी यादों से जुड़ा हर पहलू मुझे उस घर की ओर ले जाता है,

माँ घर याद आता है मुझे,

जहां तेरी मुस्कान बस्ती है वह सब याद आता है मुझे।

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