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Showing posts from July, 2020

मीडिया अमिताभ के साथ हैं वहीं आसाम देखता आस हैं। Assam:Amitabh & Media

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हम एक ऐसे 'देश' में रहते है जहां 'अमिताभ बच्चन' अगर  'वॉशरूम'  भी चले जाते है तो हेडलाइन्स बना दी जाती है  लेकिन 'असम' में आयी बाढ़  के बारे में किसी को चिंता नही है ! में सोचती हूं  पत्रकारों ने अपनी 'आत्माएं' बेच दी है , ओर सब कुछ   जो वो करते है वो बस " व्यापारिक पत्रकारिता" रह गयी है  जो केवल भीड़ को इकट्ठा कर के लिए होती है और  केवल अपने फायदे के लिए वो हकीकत को छुपा दिया जाता है मतलब सच्चाई को छुपा दिया जाता है , लेकिन ' मीडिया' यह सब नही दिखाएगा  , क्योंकि मीडिया के मुताबिक  'उत्तर-पूर्व' की परेशानियो के बारे में बात करना उनके लिए फायदेमंद नही है चूँकि  इससे उन्हें किसी प्रकार के व्यवसायिक रुचियां नही मिलने  वाली , वे  इन मामलों पर तब तक ध्यान नही देंगे जब तक कि  उन्हें इससे व्यवसायिक फायदा ना मिले , लेकिन जब तक वो इन मसलों पर बात नही करेंगे तो कैसे इन मसलो की ओर ध्यान जाएगा! 20 लाख लोगों से ज्यादा बाढ़ से प्रभावित हुए है और  70 से ज्यादा लोग मारे जा चुके है  यहां तक की कि " काज़ीरंगा  राष...

विकास दुबे मर्डर या एनकाउंटर?

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आज हम बात करेंगे उन सब चीज़ो के बारे में जो आप "विकास दुबे केस"  के बारे में जानना  चाहते है! जब हम पूरे परिदृश्य को देखते है तो ये बहुत फिल्मी लगता है ! एक ' अपराधी, बदमाश'  राजनीति से जुड़ता है  क्योंकि  उसके पास लोगो का पूरा सहयोग " सपोर्ट"  है चाहे फिर उसने ये  पैसों से , बाहुबल से या दूसरी राजनीतिक पार्टीयो से सांठ -गांठ  करके हासिल किया हो !  वो लोग जो इस मामले में शामिल है  और राजनीतिक पार्टिया भी  जिन्हीने उसे एक मोहरे की तरह  , बहुत गहराई से हर जगह इस्तेमाल किया है !ये जानते है कि यह  आदमी  उन्हें जीता सकता है बदमाशों से या अंकुश से । तो यह आदमी  "राजनीतिक सपोर्ट " मिलने के  बाद ओर बेकार हो जाता है  क्योंकि वह यह जनता है कि  अब उसे कोई  रोक नही सकता है तो वह बिना किसी डर के अपराध  कर सकता है और  खून -खराबा  जारी रहेगा!    अब यहां कहानी में मोड़ तब आता है जब एक दिन अचानक  कुछ पुलिस वाले उसे पकड़ने निकलते है  लेकिन उसे दो पुलिसकर्मीयो द्वारा प...

जानिये विदेशी एप्प्स की छुपी सच्चाई ओर कीजिये टिक-टॉक की मुँह दिखाई!!

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नमस्कार दोस्तों आज हम टिक टॉक विषय पर चर्चा करेंगे:  आज भारतीय युवाओं को टिक टॉक की लत लग चुकी है टिकटोक बैन होने पर हमारे समक्ष कई ऐसे वीडियो आए जिसमें भारत का युवा टिक टॉक के लिए रो रहा है और अपनी सरकार के विरुद्ध खड़े होने तक को तैयार है| भारत का  युवा  चाइनीस एप टिक टॉक का उद्देश्य यही नहीं समझ पा रहे है ,यह टिक टॉक लत लगाने वाली प्रवृत्ति का है और इसने भारत के लोगों को अपना गुलाम बना लिया है इसकी 15 सेकंड की वीडियो मस्तिष्क में बहुत ही  भयानक असर डालती है नतीजन मूड स्विंग्स और खराब याददाश्त तो आम बात हो जाती है। जैसा हम सब यह देख सकते है कि  छोटे बच्चे वयस्क / प्रौढ़  वीडियो बना रहे है ओर साथ ही यह बहुत अजीब भी लगता है कि यह  वयस्क कंटेंट बच्चो के लिए  बड़ी आसानी से  उपलब्ध है ओर ना ही इस पर किसी प्रकार का पाबंदी ,चाइल्ड लॉक(बाल बंध) है या फिर कुछ ऐसा जो कि इन मासूम  निर्दोष बच्चो को इन सब से बचा सके! यह  हर एक को यह ताकत देता है की वह  हर  तरह की वीडियो अश्लील ,असामाजिक या अमानवीय वीडियो  तक बड़ी आसानी से पहुँच सके...

असमंजस -आपदा या अवसर

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नमस्कार!  हाल के इस आपदा काल मे  बीते कुछ दिनों पहले छात्रों को लेकर सरकार का एक आश्चर्यजनक निर्णय सामने आया कि वर्तमान समय की गम्भीरता को देखते हुए यू. जी., पी. जी.  के समस्त छात्रो को सामान्य पदोन्नति मतबल "जनरल प्रमोशन"  दिया जाएगा! इस घोषणा को सुनते है शिक्षक ओर दिक्षक दोनो राहत की सांस ली की अब घर में रहकर ओर आने तनाव को थोड़ा कम करके इस आपदा से लड़ा जाए| इस निर्णय से प्रथम ,द्वितीय वर्ष की छात्र- छात्राओं में प्रसन्नता थी   तो अंतिम वर्ष के छात्रों के मन मे संतोष के साथ थोड़ी चिंता भी , प्लेसमनेट , कैरियर ओर भविष्य की चिंता सो अलग, इस अनिश्चितता भरे दौर में इस तरह से छात्रों के साथ जो उथल -पुथल मची है उससे हम सभी कम अवगत नही है! जनरल प्रमोशन की खबर मिलते ही पालको में सन्तोष व्याप्त हुआ कि अब उनके नोनिहालो को बाहर निकल कर अपनी जान दाव पर नही लगानी होगी| लेकिन अभी हालही  में केंद्र सरकार द्वारा यू.जी एवं पी.जी.  अंतिम वर्ष को कराने की अनुमति दिए जाने से छात्र , शिक्षक और पालक वर्ग पुनः उसी दोराहे पर आ खड़ा हुआ जहाँ वो पहले था , पुनः असंजस की स्थित...

अनकही सच्चाई

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मानसिक रोग, ओह!  क्या वह सच मे होते है? ....  हम में से बहुत से लोगो ने इसके बारे में  विचार किया है , "चिंता" क्या होती है? "तनाव" क्या होता है? हम में से बहुतो के अनुसार ये केवल केवल एक मानसिक अवस्था है! क्या हम यह मानते है कि मानसिक रोग कठोर घातक रोग है ? 'कभी नही' ओर यदि कोई व्यक्ति मानसिक रोग के लिए डॉक्टर से परामर्श लेता भी है तो हम उसे पागल या विक्षिप्त मान लेते है! हां, आप सही है आज हम बात करने जा रहे है 'तनाव' के बारे में! हाँ, में यह जानती हूं कि आप सभी इसपर तब से बात कर रहे है जबसे "सुशांत सिंह राजपूत" का आकस्मिक निधन हुआ है, पर क्या आपने कभी यह महसूस किया है की मानसिक रोग के कई प्रकार है, अब यह गम्भीर आवश्यकता है कि हम सभी को इसे  बीमारी  मानना होगा! मुझे यह समझ नही आता कि क्यू हम हमेशा  इनकार करने लगते है जब बात  मानसिक रोग पर आती है! इस जीवन मे , हम ऐसी जिंदगी जी रहे है  जिस पर हमें  'फेसबुक','इंस्टाग्राम','व्हाट्सप' आदि पर ये दिखाना है कि हम कितने खुश है !  हम यह तो भूल ही गए है कि सच्ची खुशी क्या है ?...